kota.पैरेंट्स की मांग : कोचिंग में टेस्ट फिर चालू कराओ, वरना बच्चों को कोटा से ले जाना पड़ेगा

संदेश न्यूज। कोटा. जिला प्रशासन की ओर से कोचिंग संस्थानों में होने वाले साप्ताहिक टेस्ट पर रोक लगाने के फैसले पर विद्यार्थियों व पैरेंट्स की विपरीत प्रतिक्रिया सामने आई है। पैरेंट्स का मानना है कि नियमित मूल्यांकन के बगैर कोचिंग और स्टडी का कोई अर्थ नहीं है। कुछ पैरेंट्स ने यह तक कह दिया कि टेस्ट दोबारा चालू नहीं किए बच्चों को हमें कोटा से ले जाना पडेÞगा। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ये टेस्ट दोबारा शुरू करने पर विचार कर रहा है। कोटा जिला कलक्टर ओपी बुनकर ने सोमवार को मीडियाकर्मियों को यह जानकारी दी।
कोचिंग संस्थानों में अध्ययनरत विद्यार्थियों में तनाव व आत्महत्या प्रकरणों की रोकथाम के लिए कार्ययोजना तैयार करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग प्रमुख शासन सचिव भवानी सिंह देथा की अध्यक्षता में गठित समिति की सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में हुई बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान एक सवाल के जवाब में जिला कलेक्टर ओपी बुनकर ने कहा, टेस्ट फिलहाल दो महीने के लिए टेंपरेरी रोके गए थे। अभी हम इस पर विचार करेंगे, क्योंकि कई लोगों से सुझाव आ रहे हैं। कोचिंग संस्थानों के पास कई पेरेंट्स बार-बार कॉल कर रहे हैं कि बिना टेस्ट बच्चों का मूल्यांकन नहीं हो सकता। बच्चों ने भी मेल के जरिए टेस्ट करवाने की अपील की है। बच्चों के पेरेंट्स का कहना है कि अगर टेस्ट नहीं रखा गया तो बच्चे को कोटा से वापस बुला लेंगे। इसलिए हम विचार करेंगे कि इसे (टेस्ट को) कैसे मोल्ड करके आसान बनाए। ताकि बच्चों पर ज्यादा प्रेशर नहीं आए और वे इंटरेस्ट लेकर पढ़ सकें।
बैठक में टीम के यह सदस्य रहे मौजूद : समिति अध्यक्ष प्रमुख शासन सचिव उच्च एवं तकनीकी शिक्षा भवानी सिंह देथा, वाणिज्यिक कर विभाग के आयुक्त डॉ.रवि सुरपुर, नेशनल हेल्थ मिशन के आयुक्त डॉ.जितेंद्र कुमार सोनी, जिला कलक्टर ओपी बुनकर, निदेशक स्थानीय निकाय विभाग हृदेश कुमार शर्मा, संयुक्त सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. फिरोज अख्तर सहित अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक चंद्रशील ठाकुर, सीनियर प्रो. मनोचिकित्सा विभाग एसएमएस अस्पताल प्रो.आलोक त्यागी सदस्य के तौर पर मौजूद रहे। समिति ने चार सत्रों में उक्त समूहों के साथ विस्तार से चर्चा कर सुझाव प्राप्त किए। यह समिति कोचिंग संस्थाओं के विद्यार्थियों में तनाव एवं आत्महत्या प्रकरणों के निराकरण के लिए उपाय एवं कार्ययोजना तैयार कर राज्य सरकार को प्रस्तुत करेंगी। शासन सचिव नवीन जैन एवं निम्हान्स, बैंगलूरू संस्थान के विशेषज्ञ भी वीसी के जरिए जुड़े।

अभिभावकों के निरंतर संपर्क में रहें
पहले सत्र में कोचिंग संस्थानों में कार्यरत काउंसलर्स के साथ संवाद हुआ। जिसमें समिति ने उनकी शैक्षणिक योग्यता, अनुभव, कार्य करने की विधि, विद्यार्थियों के साथ उनके बातचीत, सामने आने वाली समस्याओं इत्यादि के बारे में पूछते हुए सुझाव लिए कि माहौल को सकारात्मक बनाने के लिए क्या किया जाना चाहिए। काउंसलर्स से बातचीत के दौरान सामने आई खामियों को दूर करने एवं उपयुक्त प्रशिक्षण लेने को कहा गया। विद्यार्थियों से काउंसलिंग का पूरा डाटा संधारित करने, मनोस्थिति को पहचानकर स्वयं समझाइश की पहल करने, अभिभावकों से निरंतर संपर्क में रहने सहित विभिन्न बिन्दुओं पर मार्गदर्शन किया।

घर जैसा वातावरण देने की कोशिश होनी चाहिए
हॉस्टल पीजी संचालकों के साथ चर्चा में समिति सदस्यों ने हॉस्टल में उपलब्ध सुविधाओं, वातावरण एवं व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी ली। समिति सदस्यों ने कहा कि हॉस्टल, पीजी इत्यादि में घर जैसा वातावरण देने की कोशिश होनी चाहिए। साथ ही मोटिवेशनल, आनंददायी गतिविधियों का समावेश करना चाहिए। परिसर में शिक्षाप्रद एवं प्रेरक सकारात्मक वाक्यों का प्रस्तुतीकरण करना चाहिए। कोचिंग संस्थानों के साथ आयोजित बैठक में समिति को सिलेबस कम करने, सप्ताह में दो दिवस अवकाश, विद्यार्थियों की हॉबी की पहचान कर उसके अनुसार म्यूजिक कार्यक्रम, खेल गतिविधियां आयोजित करने, रोजगार के विकल्पों की जानकारी देने, अभिभावकों की काउंसलिंग एवं हॉस्टलों में बायोमैट्रिक उपस्थिति के संबंध में सुझाव प्राप्त हुए।
नीट की परीक्षा भी वर्ष
में दो बार कराने का सुझाव
सिविल सोसायटी एवं मीडिया के साथ आयोजित बैठक में खादी बोर्ड के उपाध्यक्ष पंकज मेहता ने नकारात्मकता दूर करने के लिए संस्कार व आध्यात्मिक शिक्षा भी देना का सुझाव दिया। डॉ.आरसी साहनी ने हॉस्टल के कमरों में दो बच्चों को रखने, गोविंद राम मित्तल ने कोचिंग में प्रवेश के समय स्क्रीनिंग करने का सुझाव दिया। डॉ.एमएल अग्रवाल ने जेईई की तरह नीट की परीक्षा भी वर्ष में दो बार कराने का सुझाव दिया। समिति को एनजीओ, योगा संस्थाओं एवं विशेषज्ञों द्वारा मौखिक एवं लिखित में सुझाव प्रस्तुत किए।

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