Kota: बारिश ने धो डाला कवि सम्मेलन, श्रोता नदारद, कवियों ने एक-दूसरे को सुनाई कविताएं

kota dussehra mela 2022
kota dussehra mela 2022

 – देर रात श्रीराम रंगमंच पर हुआ कार्यक्रम, श्रोताओं के नाम पर रहे निगमकर्मी व पुलिसकर्मियों समेत 50-60 लोग
– रात 12 बजे पहुंचे मुख्य अतिथि, किया स्वागत

kota dussehra mela 2022
The rain washed away the poet’s conference, the audience was absent,

संदेश न्यूज। कोटा. कोटा में शुक्रवार शाम से बारिश की ऐसी झड़ी लगी कि दशहरा मेले में आयोजित अटल राष्ट्रीय कवि सम्मेलन भी इसने धो डाला। दशहरा मैदान स्थित विजयश्री रंगमंच पर यह कवि सम्मेलन रात आठ बजे शुरू होना था, लेकिन लगातार बारिश के चलते वहां कार्यक्रम शुरू नहीं हो पाया। रात को दस बजे तक बारिश के रुकने का इंतजार होता रहा, लेकिन तब तक भी बारिश नहीं रुकी तो कार्यक्रम को श्रीराम रंगमंच पर शिफ्ट कर दिया गया। श्रीराम रंगमंच भी इस कार्यक्रम के लिए तैयार नहीं था। वहां मजदूर सो रहे थे और कचरा इधर-उधर फैला हुआ था। तत्काल निगम की  टीम को बुलवाकर वहां सफाई करवाई गई। इस दौरान सम्मेलन में आमंत्रित 21 कवि रंगमंच के एक कक्ष में बैठे रहे। इस रंगमंच की दर्शक दीर्घा में भी शेड नहीं है। इसलिए रंगमंच पर ही एक तरफ कवियों को सोफे लगाकर बैठाया तथा उनके सामने कुछ कुर्सियां लगाकर श्रोताओं के बैठने का इंतजाम किया गया। हालांकि श्रोताओं के नाम पर उस वक्त केवल नगर निगम के कर्मचारी, अधिकारी, पुलिसकर्मी, 4-5 पार्षद व मेले की व्यवस्थाओं से संबंधित लोग ही मौजूद थे। इनकी भी संख्या 50-60 ही थी। कवि एक-दूसरे को तथा सामने बैठे इन्हीं श्रोताओं को कविताएं सुनाते रहे। व्यवस्थाएं होने के बाद रात करीब ग्यारह बजे कवि सम्मेलन प्रारंभ हो पाया, जो समाचार लिखे जाने तक जारी था।
इससे पहले, मेला समिति की अध्यक्ष मंजू मेहरा, मेला अधिकारी गजेंद्र सिंह, सदस्य पवन मीणा, सोनू कुरैेशी, अनिल सुवालका, पार्षद देवेश तिवारी समेत अन्य निगम पदाधिकारियों ने दीप प्रज्ज्वलन कर कवि सम्मेलन का शुभारंभ किया। मुख्य अतिथि मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. विजय सरदाना रात 12 बजे कवि सम्मेलन में पहुंचे, जिनका स्वागत किया गया। कवि सम्मेलन का केबल चैनल पर सीधा प्रसारण भी किया गया। संचालन कवि अजातशत्रु ने किया। शुरुआत में कवि अतुल ज्वाला ने ‘इतिहास हमें सिखाता है…खुद्दारी से जीना केवल राजस्थान सिखाता है.. गाकर राजपूताने की महिमा का बखान किया। हास्य कवि देवेंद्र वैष्णव ने ‘ये हिंदुस्तान हमारा है..’ सुनाई। कवि भूपेंद्र राठौर ने ‘एक बार फिर पंडित का घर काश्मीर में टूटा है, लाल किले से अच्छे दिन का नारा सबसे झूठा है…, प्रस्तुत की। कविता किरण ने ‘कविता की फुलवारी है, किरणों की केसर क्यारी है…’ रचना पढ़ी। वहीं, कवि संजय शुक्ला ने ‘हमारे देश की मिट्टी.. ’ गाकर ओजस्वी रंग भरे। सुनील व्यास ने शहरी बनने के लिए हम भाईयों ने खानदानी खेत बांट लिए.. सपना सोनी ने ‘मेरे मन की धरा पर मधुर भाव है.., ओम सोनी ने इस माटी को नमन करें… कविता सुनाकर दाद बटोरी। नरेश निर्भीक, प्रवीण पंवार, डॉ. आदित्य, शशांक नीरज निशामुनि गौड़, अजात शत्रु, रणजीत सिंह, कवि बलवंत व अशोक चारण ने कविताएं प्रस्तुत की।

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