राजस्थान माइनर मिनरल कन्सेशन नियमों को किया सरल, लीज अवधि 2040 तक बढ़ाई

जयपुर. राज्य सरकार ने माइनर मिनरल सेक्टर को बूस्ट करने, वैध खनन को बढ़ावा देने, प्रक्रिया को युक्तिसंगत एवं पारदर्शी बनाने और राज्य के राजस्व में बढ़ोतरी के लिए राजस्थान माइनर मिनरल कन्सेशन नियमों का सरलीकरण किया है।

खान विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुबोध अग्रवाल ने बताया कि संशोधित नियमोें के अनुसार अब लीज अवधि 2040 तक बढ़ाने, खनन पट्टों का आसानी से हस्तांतरण, एक हैक्टयर से कम स्ट्रिप लीजधारी को आवंटित करने, खातेदारी में खनन पट्टा जारी करने की अधिकतम सीमा 4 हैक्टेयर को हटाने, लीज जारी होने के एक साल की अवधि में पर्यावरण क्लीयरेंस लाने की छूट के साथ ही खनन पट्टाधारियों को त्रैमासिक आॅन लाइन रिटर्न भरने की सुविधा दी गई है।

डॉ. अग्रवाल ने बताया कि नए संशोधित प्रावधानों के अनुसार अब 15 गुणा डेडरेंट प्रीमियम पर 31 मार्च, 2025 को समाप्त हो रही माइनर मिनरल के खनन पट्टों और क्वारी लाइसेंस की अवधि 31 मार्च 2040 तक बढ़ा दी गई है। इससे खनन पट्टाधारियों एवं क्वारी लाइसेंसधारियों को रिन्यूवल की जटिलताओं से छुटकारा मिल सकेगा और राज्य सरकार के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी। इसी तरह से खनन पट्टों के पास की एक हैक्टेयर से कम क्षेत्र के स्ट्रीप क्षेत्र को संबंधित खननपट्टाधारी को आवंटित किया जा सकेगा।

अब तक खनन पट्टों के हस्तांतरण की प्रक्रिया अत्यधिक जटिल थी जिसे आसान बनाते हुए संशोधित नियमों के अनुसार माइनर मेजर के खननपट्टाधारी से लीज हस्तांतरण पर डेड रेंट लाइसेंस फीस प्रीमियम 10 गुणा एवं अधिकतम 10 लाख के स्थान पर 5 लाख एवं अधिकतम 5 लाख रुपए लिया जाएगा। इसी तरह से खनन पट्टाधारियों को मासिक के स्थान पर त्रैमासिक रिटर्न सबमिट करने की सुविधा दी गई है। मासिक रिटर्न नहीं भरने पर 500 रुपए प्रतिदिन का जुर्माना होता था, उसे अब 500 रुपए प्रतिमाह एवं अधिकतम 5 हजार रुपए किया गया है।

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