ईआरसीपी को लेकर हुई सर्वदलीय बैठक, मुख्यमंत्री ने कहा- हमने भाजपा सरकार की योजना को आगे बढ़ाया

जयपुर. ईस्टर्न कैनाल परियोजना (ईआरसीपी) पर सर्वसम्मति बनाने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने रविवार शाम अपने आवास पर सर्वदलीय बैठक की। बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, बीजेपी के उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़, प्रवक्ता रामलाल शर्मा, माकपा विधायक बलराम पूनिया, आरएलडी के विधायक सुभाष गर्ग, विधानसभा स्पीकर सीपी जोशी भी शामिल हुए।

बैठक में सभी दलों के प्रतिनिधियों ने इस प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने की मांग का समर्थन करते हुए जल्द से जल्द इस मामले को लेकर केंद्र सरकार से वार्ता की मांग भी की। सर्वदलीय बैठक को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि यह योजना पूर्ववर्ती वसुंधरा सरकार के समय बनी थी, हमने तो इस योजना को आगे बढ़ाया है। हम बीजेपी की सरकारों की तरह पूर्ववर्ती सरकारों की योजनाओं को बंद नहीं करते , जिस तरह से रिफाइनरी को 4 साल के लिए बंद कर दिया गया था।

प्रधानमंत्री को याद दिलाएं उनका वादा
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस योजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने का वादा किया था । प्रधानमंत्री अलग राज्यों में जाते हैं और कोई ना कोई वादा करते हैं। ऐसे में अगर उन्हें उनका वादा याद नहीं रहता तो कम से कम उन्हें उनका वादा याद दिलाने का काम करना चाहिए ना कि इस मसले पर बयान बाजी करनी चाहिए।

इस मामले में भाजपा नेता करें नेतृत्व
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि ईआरसीपी के मुद्दे पर सभी को मिलकर दिल्ली चलना चाहिए और इसका नेतृत्व बीजेपी के नेताओं को ही करनी चाहिए क्योंकि यह योजना आप के समय बनी थी हमने तो केवल इस योजना को आगे बढ़ाना है। इस पर उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि आप अपने अधिकारियों को हमारे साथ दिल्ली भेजिए हम दिल्ली चलने को तैयार हैं।

वसुंधरा-कटारिया नहीं आए, सीएम ने जताई नाराजगी
बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, नेता प्रतिपक्ष सिंह गुलाब चंद कटारिया और बीजेपी अध्यक्ष सतीश पूनिया शामिल नहीं हुए। जिस पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने नाराजगी जाहिर की। गहलोत ने कहा कि अगर सभी लोग बैठक में आते तो सबके अपने अपने सुझाव होते। सीएम गहलोत ने कहा कि हम इस मुद्दे पर कोई राजनीति नहीं करना चाहते क्योंकि यह राजस्थान के 13 जिलों के से जुड़े लोगों का मामला है। अगर राजनीति करनी होती तो हम सर्वदलीय बैठक कभी नहीं बुलाते।

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