संजय राउत के घर पहुंची ED, 10 अफसर 4 घंटे से कर रहे पूछताछ, हिरासत में लेने की तैयारी

मुंबई. शिवसेना सांसद संजय राउत के घर सुबह साढ़े सात बजे ED की टीम पहुंची। टीम ने राउत का दादर का फ्लैट सील कर दिया है। यह फ्लैट राउत ने 83 लाख रुपए में खरीदा था। इसी फ्लैट को खरीदने के लिए राउत की पत्नी वर्षा राउत के खाते में पैसा ट्रांसफर किया गया थाा।

4 घंटे से राउत से पूछताछ जारी है। राउत के कमरे की भी तलाशी ली गई। टीम में 10 अफसर हैं। राउत के अलावा उनके परिवार से भी पूछताछ की रही है। महाराष्ट्र के 1034 करोड़ के पात्रा चॉल जमीन घोटाला मामले में ED की टीम संजय राउत से पूछताछ कर रही है। वहीं, ED दफ्तर पर बड़ी संख्या में पुलिस तैनात की गई है। संभावना है कि राउत को हिरासत में लेकर यहां लाया जा सकता है।

राउत को 27 जुलाई को ED ने तलब किया था। वह अधिकारियों के सामने पेश नहीं हुए थे। इसके बाद ED के अधिकारी उनके घर पहुंचे हैं। संजय राउत और उनके विधायक भाई सुनील राउत दोनों इस वक्त अपने भांडुप के बंगले मैत्री पर मौजूद हैं।

राउत बोले- मेरा किसी घोटाले से कोई लेना-देना नहीं
ED की कार्रवाई शुरू होने के बाद संजय राउत ने ट्वीट करके अपनी सफाई दी। राउत ने कहा- मेरा किसी घोटाले से कोई लेना-देना नहीं है। मैं शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे की शपथ लेकर यह कह रहा हूं। बालासाहेब ने हमें लड़ना सिखाया है। मैं शिवसेना के लिए लड़ना जारी रखूंगा। यह झूठी कार्रवाई है। झूठा सबूत है। मैं शिवसेना नहीं छोड़ूंगा। मैं मर भी जाऊं तो समर्पण नहीं करूंगा।

राउत के घर के बाहर जमा हुए शिवसेना कार्यकर्ता
संजय राउत के घर ED की कार्रवाई की जानकारी मिलते ही शिवसेना कार्यकर्ता उनके घर के बाहर जमा होना शुरू हो गए हैं। कार्यकर्ता केंद्र सरकार और भाजपा के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं।

11 करोड़ की संपत्ति हो चुकी जब्त
यह मामला मुंबई के गोरेगांव इलाके में पात्रा चॉल से जुड़ा है। यह महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवेलपमेंट अथॉरिटी का भूखंड है। इसमें करीब 1034 करोड़ का घोटाला होने का आरोप है। इस केस में संजय राउत की नौ करोड़ रुपए और राउत की पत्नी वर्षा की दो करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त हो चुकी है।

आरोप है कि रीयल एस्टेट कारोबारी प्रवीण राउत ने पात्रा चॉल में रह रहे लोगों से धोखा किया। एक कंस्ट्रक्शन कंपनी को इस भूखंड पर 3000 फ्लैट बनाने का काम मिला था। इनमें से 672 फ्लैट पहले से यहां रहने वालों को देने थे। शेष MHADA और उक्त कंपनी को दिए जाने थे, लेकिन साल 2011 में इस विशाल भूखंड के कुछ हिस्सों को दूसरे बिल्डरों को बेच दिया गया था।

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