बागी शिंदे ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- उद्धव सरकार के पास बहुमत नहीं, थोड़ी देर में सुनवाई

नई दिल्ली. महाराष्ट्र का सियासी संग्राम 7वें दिन सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है। बागी विधायक एकनाथ शिंदे की याचिका पर जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस बीएस पादरीवाला की बेंच अब से कुछ देर में सुनवाई करेगी। शिंदे ने अर्जी में कहा है कि उद्धव सरकार ने बहुमत खो दिया है।

शिंदे का पक्ष हरीश साल्वे और शिवसेना का पक्ष अभिषेक मनु सिंघवी रखेंगे। सुनवाई का लाइव टेलीकास्ट गुवाहाटी में बैठे बागी विधायक भी देख सकेंगे।

​​​​​शिदें गुट के विधायक सुप्रीम कोर्ट क्यों गए
महाराष्ट्र विधानसभा के डिप्टी स्पीकर ने एक नोटिस जारी कर शिवसेना के बागी विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया। इस नोटिस के खिलाफ शिंदे गुट के विधायक सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए। बागी विधायकों का तर्क है कि शिवसेना विधायक दल के 2 तिहाई से ज्यादा सदस्य हमारा समर्थन करते हैं। यह जानने के बाद भी डिप्टी स्पीकर ने 21 जून को पार्टी के विधायक दल का नया नेता नियुक्त कर दिया।

विधायकों ने कोर्ट में सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया
एक याचिका में विधायकों ने अपने और अपने परिवार की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया है। बागी विधायकों का कहना है कि शिवसेना नेताओं की ओर से उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं। ऐसे में उन्हें और उनके परिवार को जान का खतरा है। दूसरे पक्ष (शिवसेना) ने न केवल उनके घर-परिवार से सुरक्षा वापस ले ली है, बल्कि बार-बार पार्टी कार्यकर्ताओं को भड़काने की कोशिश की जा रही है।

याचिकाकर्ता के कुछ सहयोगियों की संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचाया गया है। विधायकों की याचिका में कहा गया है कि हमने अभी शिवसेना की सदस्यता नहीं छोड़ी है।

16 विधायकों की ओर से भी दाखिल की गई है अर्जी
भरत गोगावले, प्रकाश राजाराम सुर्वे, तानाजी जयवंत सावंत, महेश संभाजीराजे शिंदे, अब्दुल सत्तार, संदीपन आसाराम भुमरे, संजय पांडुरंग शिरसाट, यामिनी यशवंत जाधव, अनिल कलजेराव बाबर, लताबाई चंद्रकांत सोनवणे, रमेश नानासाहेब बोरनारे, संजय भास्कर रायमुलकर, चिमनराव रूपचंद पाटिल, बालाजी देवीदासराव कल्याणकर, बालाजी प्रहलाद किनिलकर। भरत गोगावले को बागी गुट अपना मुख्य सचेतक नियुक्त कर चुका है।

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