पहली झलक: कोटा बैराज के 13 गेट खुले तब ऐसा दिखा निर्माणाधीन चम्बल रिवर फ्रंट, घाटों के नजदीक आया पानी

कोटा. कोटा बैराज के 13 गेट खोलकर मंगलवार रात से बुधवार सुबह तक 1 लाख 90 हजार क्यूसैक पानी की निकासी की गई, तब निर्माणाधीन चम्बल रिवर फ्रंट पर कैसा नजारा रहा? रिवर फ्रंट पर चल रहे कार्यों का क्या हाल रहा? यह जानने की शहरवासियों को उत्सुकता रही, तो ये है पहली झलक इस आकर्षक नजारे की। बैराज से पानी की निकासी के दौरान ड्रोन से ली गई ये तस्वीरें रिवर फ्रंट का विहंगम दृश्य प्रस्तुत कर रही है।

इसमें पानी फिलहाल रिवर फ्रंट के अंतर्गत बनाए गए घाट और उनकी सीढ़ियों के पास से बहता दिख रहा है। यहां के सौंदर्यीकरण कार्य इस लेवल से काफी ऊपर के हिस्से में चलते दिख रहे हैं। वहां ऊंचाई पर मशीनें भी काम करती नजर आ रही हैं।

Kota Chambal River Front

रिवर फ्रंट के कार्य की देखरेख कर रहे इंजीनियर्स का कहना है कि चम्बल रिवर फ्रंट में पानी का बेस लेवल समुद्र तल से 236 मीटर की ऊंचाई पर निर्धारित है। यानी इस लेवल तक सालभर पानी भरा रहेगा।

Kota Chambal River Front

मंगलवार-बुधवार को बैराज से 1 लाख 90 हजार क्यूसैक पानी की निकासी गई तो पानी का लेवल समुद्र तल से 241 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचा। अर्थात बेस लेवल से 5 मीटर ऊपर। कोटा बैराज से सर्वाधिक पानी की निकासी तीन साल पहले 7 लाख 10 हजार क्यूसैक की हुई थी, तब चम्बल के किनारों पर पानी का लेवल समुद्र तल से 248 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचा था।

Kota Chambal River Front

पानी के इस अधिकतम लेवल को आधार मानते हुए चम्बल रिवर फ्रंट के सौंदर्यीकरण के सभी प्रमुख कार्य समुद्र तल से 250 मीटर की ऊंचाई पर किए जा रहे हैं। इंजीनियर्स का दावा है कि सात लाख क्यूसैक से ज्यादा पानी की भी निकासी कभी कोटा बैराज से करनी पड़ी तब भी रिवर फ्रंट के मुख्य सौंदर्यीकरण वाले हिस्से तक पानी नहीं पहुंचेगा। उन्हें कोई नुकसान नहीं होगा।

रिवर फ्रंट के विकास कार्य एक नजर में

  • 42 मीटर ऊंची, 20 मीटर के पेडस्टल पर लगेगी संगमरमर की चम्बल माता की प्रतिमा
  • वृंदावन गार्डन की तर्ज पर बैराज गार्डन का निर्माण, इस गार्डन पर 40 मीटर व्यास के फव्वारे
  • पश्चिमी तट पर 55 टन का सबसे बड़ा घंटा
  • एलईडी गार्ड, नंदी घाट में सेड स्टोन से भारत के सबसे विशाल नंदी की स्थापना
  • राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों जैसे हाड़ौती, मारवाड़, मेवाड़, शेखावाटी, बृज एवं दुंधाड़ क्षेत्र की वास्तुशिल्प कला में फसाड कार्य
  • सांस्कृतिक घाट, साहित्य घाट, सिंह घाट, आध्यात्मिक घाट, छतरी घाट का निर्माण
  • नयापुरा में बावड़ी और उद्यान का निर्माण विकास कार्य

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