बादल थमे, उफान पर चम्बल: कोटा बैराज से 6 लाख क्यूसेक पानी की निकासी

कोटा. कोटा संभाग में मंगलवार को बादल का शोर थम गया, हालांकि चम्बल में उफान कम नहीं हुआ। मध्यप्रदेश में लगातार बरसात के बाद गांधी सागर से पानी की निकासी के चलते कोटा बैराज के सभी गेट खोलकर पानी की निकासी की जा रही है। कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़ सहित एमपी के कई शहर भी बरसात से प्रभावित हुए हैं। सबसे बुरा हाल कोटा जिले में देखने को मिल रहा है, जहां बचाव दल सुबह से लेकर शाम तक मशक्कत कर लोगों को सुरक्षित स्थान पर छोड़ रहा है।

संभाग का मध्य प्रदेश के साथ-साथ आपसी जिलों में भी संपर्क कट गया है। प्रशासन ने नदी के पास के क्षेत्र लो लाइन एरिया में बाढ़ का खतरा बढ़ने से लोगों को निकालना शुरू कर दिया है, कोटा से झालावाड़ और झालावाड़ से बारां जाना बंद है, इसके साथ ही कोटा जिले के पीपल्दा उपखंड से भी संपर्क टूट गया है। सवाई माधोपुर का रास्ता भी बंद हो गया है, जिसके चलते लोग आवागमन नहीं कर पा रहे हैं।

राहत कार्य मुस्तैदी से हो: धारीवाल
नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल ने जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि जलभराव वाले क्षेत्रों से पानी उतरते ही सर्वे किया जाए। जिला प्रशासन द्वारा स्थापित किए गए राहत शिविरों में प्रभावितों को ठहरने एवं भोजन आदि की सुविधाओं का ध्यान रखा जाए। उन्होंने वार्ता कर मंगलवार को लगातार शहर के हालातों पर फीडबैक लिया। उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा समय-समय पर जलभराव को लेकर दी जा रही गाइडलाइन की आमजन पालना करें, वही उन्होंने जनप्रतिनिधियों से भी एक बार फिर अपील की कि अपने-अपने क्षेत्रों में जहां भी जलभराव के हालात हैं। राहत और बचाव कार्य में जुटे रहें।

2019 में की थी 7 लाख क्यूसेक पानी की निकासी
कोटा बैराज से 6 लाख क्यूसेक तक होने जा रही है। इसके चलते लो लाइन एरिया के कई गांव क्षेत्र में डूब जाएंगे, जहां से लोगों को निकाला जा रहा है, साल 2019 में भी चंबल नदी से 7 लाख 9000 क्यूसेक पानी की निकासी कोटा बैराज से की गई थी।

कोटा बैराज से 6.46 लाख क्यूसेक से अधिक निकासी
अधीक्षण अभियंता जल संसाधन कोटा बैराज एडी अंसारी ने बताया कि गांधी सागर बांध में 1309.97 फीट जलस्तर है तथा 8 लाख 13 हजार 177 क्यूसेक पानी की आवक हो रही है। जिससे 4 लाख 54 हजार 848 क्यूसेक से अधिक पानी की निकासी की जा रही है। उन्होंने बताया कि गांधी सागर बांध के सभी 19 गेट खोल दिए गए है, जिससे कोटा बैराज का जलस्तर वर्तमान में 852 फीट बना हुआ है, 6 लाख 20 हजार क्यूसेक पानी की 17 गेटों से निकासी की जा रही है।

हाड़ौती अंचल में कई इलाके बने टापू
हाड़ौती के दो दर्जन से ज्यादा शहर व गांव टापू बन गए हैं, जहां पर रेस्क्यू टीम ने लोगों को निकालना शुरू कर दिया है, वहीं कोटा संभाग में लोगों को निकालने के लिए सेना की मदद भी मांगी गई है। साथ ही कोटा संभाग में दूसरी जगह से एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमों को बुलाया
गया है।

रेस्क्यू अभियान जारी, 600 व्यक्तियों को कैथून से किया रेस्क्यू
बचाव दल में एसडीआरएफ व नगर निगम टीम द्वारा चट्टानेश्वर में डूबे हुए एक व्यक्ति की बॉडी को रिकवर किया। देवली अरब रोड कौटिल्य नगर में बाढ़ में फंसे 60 लोगों को रेस्क्यू किया। टीम द्वारा 135 लोगों को गेंता कीर पुरिया इटावा से रेस्क्यू किया। एक व्यक्ति को साजिदेहड़ा से रेस्क्यू किया वहीं 600 लोगों को कैथून में रेस्क्यू किया।

एनडीआरएफ द्वारा किया गया रेस्क्यू
एनडीआरएफ की टीम ने 36 व्यक्तियों को आरामपुरा कैथून से रेस्क्यू किया, 12 व्यक्तियों को धाकड़ खेड़ी से, 2 लोगों को तकली नदी के बीच में से रेस्क्यू किया। टीम ने 30 व्यक्तियों को लाख सनीजा जैसे रेस्क्यू किया। 34 व्यक्तियों को आरामपुरा खेड़ा से रेस्क्यू किया। 12 व्यक्तियों को धाकड़ खेड़ी कोटा रोड से रेस्क्यू किया, टीम ने दो व्यक्तियों को कंवरपुरा से रेस्क्यू किया गया है।

पानी के साथ आ रहे मगरमच्छ व सांप
जहां एक और बाढ़ से हालत खराब हो रही है वहीं सांप और मगरमच्छों का भी भय सताने लगा है। करीब आठ-दस मगरमच्छ अब तक लोगों के घरों पर दस्तक दे चुके हैं। देवली अरब, नयापुरा, बजरंग नगर, चन्द्रेसल, डीसीएम, कंसवा सहित कई जगह मगरमच्छों का आतंक बढता जा रहा है। वहीं रेलवे कॉलोनी में भी लोगों के घरों के बाहर मगरमच्छ देखे जा रहे हैं।

अस्पताल ऑफिस व स्कूलों में भी पानी
कोटा के कैथून में जहां अस्पताल में पानी भरने से स्कूल में उपचार हो रहा है तो कई स्कूल भी जलमग्न हो गए हैं। कोटा के सेंटपॉल स्कूल में क्लासों तक पानी पहुंच गया तो स्टेशन क्षेत्र में दुकानों और ऑफिसों में भी पानी खुस गया है। ऐसे में काम करना मुश्किल हो रहा है। प्रशासन के सारे प्रशस नाकाफी साबित हो रहे हैं।

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