बैराज डाउन, कोटा उत्तर का पारा हाई: चौथे दिन भी नहीं टपके नल, 3 लाख परिवारों के लिए सिर्फ 30 टैंकर ही जुटा पाया प्रशासन

  • कैम्पर, टैंकर और दमकल के भरोसे शहर

कोटा. शहर में बरसात थम गई। मध्यप्रदेश में भी बरसात थम गई। चम्बल में पानी का फ्लो कम होने के बाद कोटा बैराज के गेट भी डाउन हो गए, बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का पानी भी उतार पर है लेकिन कोटा उत्तर के लोगों का पारा अभी भी हाई है। यहां चौथे दिन भी पेयजल आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी। पानी बंद होने से करीब तीन लाख परिवार प्रभावित हैं। पानी नहीं मिलने से लोगों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है।

कोटा उत्तर के अधिकांश क्षेत्र कैंपर सप्लाई, टैंकर और दमकल के जरिए हो रही पानी की सप्लाई पर निर्भर हो गए हैं। हाल ये है कि हर गली-हर सड़क पर बाइक, कार, ठेला, साइकिल पर लोग पानी लाते-ले जाते नजर आ रहे हैं। लोगों में गुस्सा देखकर प्रशासन हरकत में तो आया लेकिन सक्रियता के बावजूद पेयजल सप्लाई के लिए मात्र 30 टैंकर ही जुटा पाया। इसके अलावा दमकलों से पेयजल आपूर्ति की गई।

प्रभावशाली व्यक्तियों का दखल
पेयजल से जुड़ी लोगों की पीड़ा उजागर होने के बाद प्रशासनिक अमला हरकत में तो आया लेकिन इसमें भी प्रभावशाली लोगों के दखल से लोग दुखी नजर आए। कहीं टैंकर पहुंचे तो कहीं लोग मांगते ही रहे। कहीं प्रभावशाली लोगों ने दमकल मंगवाकर पानी भरवा लिया। प्रभावशाली लोगों के घरों में टंकियां भर गई, उधर जरुरतमंद लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल सका, हैंडपंपों पर भीड़ लगी रही। पेयजल सप्लाई करने वाले भी सीधे मोटर से पानी भरकर कैम्पर देते रहे। पानी खरीदने के लिए भी लोगों की भीड़ नजर आई।

चम्बल में बाढ़, लेकिन तीन दिन से नहीं नहाए
प्रभावित इलाकों में लोगों ने बताया कि नहाये हुए तीन दिन से ज्यादा का समय हो गया है, अब तो कपड़ों में भी बदबू आने लगी है। शौचालयों में डालने के लिए पानी नहीं है। पानी नहीं होने से कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कोटा उत्तर विधानसभा के नयापुरा क्षेत्र में इस्माइल चौक, हरिजन बस्ती, मस्जिद चौक, बग्गी खाना, दोस्तपुरा, गांवड़ी, वोकेशनल स्कूल के पीछे वाली बस्ती, सिविल लाइन, खेड़ली फाटक, स्टेशन, नदी पार क्षेत्र के विभिन्न कॉलोनी में पेयजल का काफी संकट रहा है। जहां हैडपम्प और बोरिंग नहीं है, उन क्षेत्रों में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

पुलिस और परिवहन विभाग ने जब्त किए टैंकर
पेयजल संकट का मामला चर्चा में आने के बाद प्रशासन ने आनन-फानन में बिना किसी प्लानिंग के धूम मचाना शुरू कर दिया। जनता का पारा हाई होते देख पुलिस और परिवहन विभाग सड़क पर उतर आए। उड़न दस्तों और थानों की पुलिस ने सड़कों पर टैंकर्स की तलाश शुरू कर दी, जो जहां मिला, जब्त कर लिया गया और शॉपिंग सेंटर स्थित जलदाय विभाग के कार्यालय भिजवाया गया।

वहां एन्ट्री कर मोहल्लों में सप्लाई के लिए भेजा गया। अधिकारियों का लावाजमा लगाकर टैंकरों मोहल्लों में पानी सप्लाई की व्यवस्था बनाने का प्रयास किया, दोपहर में शुरू हुई यह एक्सरसाइज शाम तक ऊंट के मुंह में जीरा साबित हुई। 3 लाख परिवारों के लिए पुलिस और परिवहन विभाग मिलकर 30 टैंकर ही जुटा पाया। उनको मोहल्लों में खाली होते ही वापस भरवाकर सप्लाई किया जा रहा था, लेकिन फिर पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं बन पा रही थी। यूआईटी सचिव राजेश जोशी ने स्वंय जलदाय विभाग के शॉपिंग सेंटर ऑफिसबैठकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। यहां पर व्यवस्था के लिए यूआईटी के जल खंड के एक्सईएन प्रकाशवीर नाथानी को नोडल अधिकारी बनाया गया था।

आज हो सकती है कोटा उत्तर में जलापूर्ति
संदेश न्यूज। कोटा. शहर के कोटा उत्तर विधानसभा क्षेत्र में पिछले चार दिन से पानी के लिए तरस रहे लोगों के लिए गुरुवार का दिन कुछ राहत लेकर आ सकता है। हालांकि गुरुवार को भी कम दबाव से ही जलापूर्ति होने की संभावना है, लेकिन पानी मिल सकता है। समस्या उजागर होने के बाद जलदाय विभाग व प्रशासन हरकत में आया और मिनी अकेलगढ़ से जलापूर्ति के लिए कवायद शुरू कर दी।

गौरतलब है कि पिछले चार दिन से आधे कोटा शहर में लोग पानी को तरस रहे हैं, जलापूर्ति तंत्र में सबकुछ ठीक होते हुए भी महज इस डर से की इंटकवैल से पानी उठाने वाले पंप कहीं बैराज के गेटों से निकल रहे पानी की वजह से टूट नहीं जाएं, पानी बंद कर दिया गया। मामला उजागर होने के बाद गुरुवार को बैराज से पानी की निकासी कम होते ही जलदाय विभाग ने लोगों को पानी उपलब्ध कराने के लिए कवायद शुरू कर दी। जलदाय विभाग के सूत्रों के अनुसार रात को इंटकवैल में पंप उतारने का कार्य शुरू कर दिया गया था, सुबह प्रभावित क्षेत्र में कम दबाव से जलापूर्ति शुरू हो जाएगी।

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