Bundi: नाबालिग से दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में दो आरोपियों को सुनाई फांसी की सजा

बूंदी. नाबालिग से दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या करने के एक बहुचर्चित मामले में बूंदी की एक अदालत ने शुक्रवार को दो आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई। बूंदी की पॉक्सो न्यायालय में 4 माह पुराने इस मामले में पेश अभियोग पत्र में कहा गया कि आरोपी सुल्तान (27), छोटू लाल (62) और एक नाबालिग ने बूंदी जिले के बसौली थाना क्षेत्र के काला कुआं गांव के पास 30 दिसंबर 2021 को एक 17 वर्षीय किशोरी की उस समय सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी थी जब वह बकरियां चराने जंगल में गई थी।

दुष्कर्मी इस कदर हैवानियत पर उतर आए थे कि चुन्नी से गला दबाकर किशोरी की हत्या करने के बाद भी वह उसके शव को नौचते रहे थे और दुष्कर्म करते रहे। बाद में फरार हो गए। किशोरी का शव बरामद होने के बाद बूंदी जिला पुलिस ने 10 थाना क्षेत्रों की पुलिस को आरोपी की गिरफ्तारी के लिए तैनात किया और इसके लिए व्यापक अभियान चलाया गया। नाबालिग सहित तीनों आरोपियों को गिरफ्तार करने में पुलिस को सफलता मिल गई।

इस घटना को लेकर समूचे बूंदी जिले में गहरे जनाक्रोश को देखते हुए इस मामले को एक आॅफिसर स्कीम के तहत लेकर जांच की गई और दोनों आरोपी सुल्तान एवं और छोटू लाल के खिलाफ बूंदी की पोक्सो कोर्ट में जबकि नाबालिग के खिलाफ बाल अपचारी अदालत (जेजे कोर्ट) में अभियोग पत्र पेश किया। बाल अपचारी अदालत में यह मामला अभी लंबित है लेकिन पॉक्सो कोर्ट के न्यायाधीश बालकृष्ण मिश्र ने इस मामले में करीब 100 पेज के आरोप पत्र पर त्वरित सुनवाई की एवं इसी सप्ताह के शुरू में दोनों आरोपियों को दोषी करार पाते हुए सजा को लंबित रखा। न्यायालय ने शुक्रवार को दोनों आरोपियों को मौत की सजा सुनाई। उन पर 1.20 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है।

पहला केस, जिसमें दो आरोपियों को एक साथ सुनाई फांसी की सजा
विशेष लोक अभियोजक महावीर सिंह किशनावत का दावा है कि यह देश का पहला ऐसा मामला है जिसमें पॉक्सो कोर्ट ने एक ही केस में दो आरोपियों को फांसी की सजा से दंडित किया है। विशिष्ट लोक अभियोजक ने इस जघन्य अपराध के लिए अपराधियों को कड़ी सजा की मांग रखी, ताकि फैसला नजीर बने। फिर से अपराधी ऐसा करने का विचार बनाने से पहले उसकी रूह कांपे। उन्होंने कहा कि आरोपियों का अपराध रेयर टू रेयरेस्ट की श्रेणी में आता है। अभियोजन पक्ष की ओर से 22 गवाह और 79 दस्तावेज प्रदर्शित कराए गए थे। केस आॅफिसर स्कीम में लेकर जल्द से जल्द प्रकरण की जांच पूरी की गई और मात्र 14 दिन में चालान पेश किया गया था।

बेहतर अनुसंधान से फांसी के फंदे तक पहुंचे अपराधी
-एमएल लाठर, पुलिस महानिदेशक राजस्थान: बालिकाओं व महिलाओं पर होने वाले अपराधों को लेकर राजस्थान पुलिस अत्यधिक संवेदनशील है। इन मामलों को अत्यधिक गम्भीरता से लिया जाकर अपराधियों की पहचान व गिरफ्तारी एवं साक्ष्य एकत्रित कर केस आॅफिसर स्कीम में लेकर अपराधियों को सजा दिलाने की पुख्ता कार्यवाही की जा रही है।

अपराधी कानून के लचीलेपन का कोई फायदा नहीं उठा सकें, इसलिए प्रकरण को सफल बनाने के लिए विशिष्ट लोक अभियोजक की नियुक्ति की गई। पुलिस ने सटीक श्रृंखलाबद्ध अनुसंधान व वैज्ञानिक तकनीकी साधनों का उपयोग किया। विशेष लोक अभियोजक ने विचारण के दौरान तथ्यों को जिस तरह प्रस्तुत किया, उसके बल पर अपराधी फांसी के फंदे तक पहुंच पाए हैं।

घना अंधेरा, सर्द मौसम, लेकिन 12 घंटे में दबोच लिए थे अपराधी
-जय यादव, एसपी बूंदी: ‘23 दिसंबर को बसोली थाना क्षेत्र नाबालिग बालिका की लाश मिली थी। इस लोमहर्षक घटना की गंभीरता को देखते हुए मैंने समस्त पुलिस जाब्ते के साथ आस पास के घने जंगलों में सघन तलाशी ली। रात का वक्त, सर्दी का मौसम और ओस के बावजूद देर रात तक सर्च आॅपरेशन चलाया। वारदात वाली जगह सड़क से डेढ़ किलोमीटर अंदर थी, जहां किसी वाहन से नहीं पहुंचा जा सकता था। लेकिन मुल्जिम साक्ष्यों से छेड़छाड़ ना कर पाएं या इलाके से बाहर न निकल जाए, इसलिए पूरे जंगल को सील कर दिया गया था।

सूरज की प्रथम किरण के साथ फिर करीब 10 थानाधिकारी, 200 पुलिस जवानों तथा डॉग स्कवॉड के साथ मिलकर पूरे जंगल में सर्च आॅपरेशन चलाया। पुलिस के कठिन परिश्रम के फलस्वरूप मात्र 12 घंटे में अपराधियों को दबोचा जा सका। यह आश्चर्य चकित करने वाला क्षण था कि इनमें तीन में से 2 अपराधी वह थे जो रातभर बड़ी चतुराई व शातिराना तरीके से अपराधियों को तलाशने का नाटक कर रहे थे। तीनों अपराधियों से पूछताछ में उन्होंने अपना जुर्म स्वीकार किया। अनुसंधान में लगी पुलिस टीम ने साक्ष्यों को एकत्रित किया व अपराधियों को न्यायालय के समक्ष उनके अंजाम तक पहुंचाने के लिए कोर्ट में चालान प्रस्तुत किया।

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